प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्षों के ऐतिहासिक नेतृत्व पर चारधाम में गूंजी विशेष प्रार्थनाएं
देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर बुधवार को देवभूमि उत्तराखण्ड आध्यात्मिक आस्था और राष्ट्रहित की विशेष प्रार्थनाओं का केंद्र बन गई। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर राज्य के चारों धाम—बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री सहित अनेक प्रमुख मंदिरों में प्रधानमंत्री के दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य एवं देश की निरंतर प्रगति के लिए विशेष पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया।
सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं, संत-महात्माओं और तीर्थ पुरोहितों की उपस्थिति देखने को मिली। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच प्रधानमंत्री मोदी के स्वस्थ एवं ऊर्जावान जीवन की कामना की गई। श्रद्धालुओं ने राष्ट्र की समृद्धि, विकास और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा के लिए भी विशेष प्रार्थनाएं कीं।
चारधाम के अलावा विश्व प्रसिद्ध शक्ति पीठों, काशी विश्वनाथ मंदिर तथा प्रदेश के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों में भी विशेष अनुष्ठानों का आयोजन हुआ। धार्मिक आयोजनों में शामिल संत समाज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने विश्व मंच पर नई पहचान स्थापित की है और भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं तथा आध्यात्मिक मूल्यों को वैश्विक सम्मान मिला है।
संतों और धर्माचार्यों ने कहा कि पिछले वर्षों में देश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और धार्मिक स्थलों के विकास को नई गति मिली है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में भारत निरंतर प्रगति करता रहे और विश्वगुरु बनने के अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़े।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास, सुशासन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने न केवल देश की आध्यात्मिक विरासत को नई पहचान दिलाई है, बल्कि उत्तराखण्ड को भी वैश्विक पर्यटन और धार्मिक मानचित्र पर विशेष स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की जनता, संत समाज और श्रद्धालुओं की शुभकामनाएं सदैव प्रधानमंत्री के साथ हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र सेवा, सांस्कृतिक जागरण और आध्यात्मिक चेतना का यह अभियान आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करता रहेगा।
धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और राष्ट्र की उन्नति, सामाजिक समरसता तथा देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए सामूहिक प्रार्थना की। पूरे दिन मंदिरों में भक्ति और श्रद्धा का विशेष वातावरण बना रहा, जिससे देवभूमि उत्तराखण्ड एक बार फिर राष्ट्रीय एकता और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक बनकर उभरी।