कोसी नदी के उफान पर आने से चुमुक गांव का संपर्क कटा,नदी में बहे 4 ग्रामीणों के मकान,खौफ में गुजरी ग्रामीणों की रात

पिछले तीन दिनों में हुई बरसात कई लोगों पर आफत बनकर टूटी है,नैनीताल जिले के रामनगर से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित चुकुम गांव का कोसी नदी के उफान पर आने पर संपर्क टूट गया है,वहीं गांव के लोगों का कहना है कि कोसी नदी के उफान पर आने से गांव की जमीन  व चार लोगों के मकान कोसी नदी में बह गए हैं।

 बता दें कि बीते दिनों हुई बारिश ने उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों में तबाही का मंजर देखने को मिला हैजहां नदी नालों के उफान पर आने पर कई जगह भूस्खलन  व भू कटाव व कई मकान बहने की घटनाएं भी सामने आई है तो वही नैनीताल जिले के रामनगर में कोसी नदी के रौद्र रूप में रामनगर से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित चुकुम गांव के 4 घर देर शाम आई कोसी नदी के उफान पर आने से बह गए और कई नाली जमीन बह गई,
बता दें कि नैनीताल के रामनगर के चुकुम गांव में कोसी नदी ने कहर बरपाया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि देर शाम कोसी नदी का बहाव गांव ने  गाँव मे काफी तबाही मचाई,उन्होंने कहां कि नदी का पानी गांव में कटाव करता हुआ चार  घरों को अपने साथ बहा ले गया, उसके साथ ही उनकी जमीन भी कोसी नदी के बहाव में बह गई और फसलों को भी नुकसान पहुंचा है,
ग्रामीण लक्ष्मण सिंह रावत ने कहा कि उनके चार लोगों के मकान मोहन सिंह,केशव राम,ललित राम,सुधामा राम, इन चार लोगों के मकान कोसी नदी के तेज बहाव में बह गए।
उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाते हुए विस्थापना की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि अभी चुकुम गांव में 80 से 90 घर मवासे रहते हैं जिसमें 300 से ज्यादा लोग यहां पर निवास करते हैं,उन्होंने कहां कि चुकुम गांव के विस्थापन के लिए प्रशासन ने 2016 में एक सर्वे भी किया था। प्रशासन की कई बैठकों के बाद तय किया गया कि जिस ग्रामीण के पास गांव में जितनी भूमि है, उन्हें उतनी ही भूमि व वर्ग 4 की भूमि पर रहने वाले प्रति परिवार के मुखिया को कुछ रकम देकर यहां से विस्थापित किया जाएगा लेकिन आज तक वो मामला भी लटका हुआ है।
वहीं मामले में उलजिलाधिकारी राहुल शाह ने कहा कि हमारे द्वारा आज राफ्ट के माध्यम से चुकुम गांव में पहुंचकर क्षेत्रीय लोगों को आपदा राहत सामग्री बांटने के साथ ही क्षेत्र का निरीक्षण किया जाएगा, उसके बाद नियम अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। गौर हो कि तेजी से विकास करने के दावे करने वाली सरकारें आजादी के 77 साल बाद भी एक गांव में पुल निर्माण नहीं करवा सकी है।
आपको बता दें कि नैनीताल जिले के रामनगर से 25 किलोमीटर दूर बसे इस आखिरी राजस्व गांव चुकुम के करीब परिवार से 652 लोग मतदाता हैं। यहां स्कूली बच्चे प्राथमिक के बाद पढ़ाई के लिए गांव से 3 किलोमीटर दूर कोसी नदी को पार कर मोहान इंटर कॉलेज जाते हैं। वहीं, स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 25 किमी। दूर रामनगर आना पड़ता है। जलस्तर बढ़ने से वो कई दिनों तक स्कूल नहीं जा पाते, जिससे पढ़ाई का नुकसान हो जाता है,
बता दें कि ये चुकुम गांव आपदाग्रस्त गांव में आता है, जहां बरसात के समय ग्रामीण काले पानी जैसी सजा काटते हैं। बाढ़ आने से चुकूम गांव का संपर्क मुख्य धारा पूरा टूट जाता है।अल्मोड़ा जिले के कुनखेत वन मार्ग से साढ़े आठ किलोमीटर का वैकल्पिक  जंगल का रास्ता है। वन्यजीवों के खतरे के बीच इस पैदल रास्ते के जरिये चुकुम गांव के ग्रामीण कुनखेत गांव पहुंचते हैं।