उत्तराखंड विधानसभा चुनाव: UKD ने खोले पत्ते, 16 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी

देहरादून। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। भाजपा और कांग्रेस के बीच चुनावी मुकाबले की तैयारियों के बीच उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) ने भी अपनी चुनावी रणनीति के तहत बड़ा कदम उठाया है। यूकेडी ने विधानसभा चुनाव के लिए अपने 16 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है।

पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती ने संसदीय बोर्ड की संस्तुति के बाद प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की। पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन के लिए फाइव-लेयर चयन प्रक्रिया अपनाई।

वरिष्ठ और समर्पित कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता

यूकेडी की पहली सूची में वरिष्ठ नेताओं, समर्पित कार्यकर्ताओं और संगठन से जुड़े चेहरों को प्राथमिकता दी गई है। पार्टी के अनुसार प्रत्याशियों के चयन में संगठन के प्रति निष्ठा, समर्पण, जनसरोकारों और उत्तराखंड के हितों के लिए किए गए संघर्ष को प्रमुख आधार बनाया गया है।

पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव में मजबूती से उतरने और उत्तराखंड में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का लक्ष्य रखा है। यूकेडी का कहना है कि शेष विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों की दूसरी सूची भी जल्द जारी की जाएगी।

यूकेडी की पहली सूची में इन 16 प्रत्याशियों को मिला टिकट

पार्टी की ओर से घोषित प्रत्याशियों की सूची इस प्रकार है:

 

विधानसभा क्षेत्र प्रत्याशी
पिथौरागढ़ काशी सिंह ऐरी
धारचूला पुष्पेश त्रिपाठी
देवप्रयाग पूर्ण सिंह कठैत
प्रतापनगर पंकज व्यास
कर्णप्रयाग आशीष नेगी
जागेश्वर दिनेश कुंजवाल
राजपुर (SC) देव चंद उत्तराखंडी
सल्ट प्रताप सिंह
टिहरी डी.डी. पंत
कपकोट वरुण चंदोला
काशीपुर प्रदीप चंद
नानकमत्ता (ST) कैलाश सिंह पांगती
रामनगर भुवन चंद
देहरादून कैंट राजेंद्र सिंह नेगी
खानपुर रितु कुड़ियाल जुयाल
घनसाली चंदन सिंह राणा

भाजपा-कांग्रेस के सामने यूकेडी की चुनौती

उत्तराखंड क्रांति दल की ओर से प्रत्याशियों की पहली सूची जारी किए जाने के बाद प्रदेश की चुनावी राजनीति में हलचल बढ़ने की उम्मीद है। खास बात यह है कि यूकेडी ने भाजपा और कांग्रेस से पहले अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुनावी तैयारी का संकेत दिया है।

सूची की घोषणा के दौरान संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष चंद्रशेखर कापड़ी भी मौजूद रहे।

अब निगाहें यूकेडी की दूसरी सूची पर टिकी हैं। देखना होगा कि पार्टी आगामी चुनाव में अपने क्षेत्रीय मुद्दों और संगठनात्मक ताकत के दम पर कितना प्रभाव छोड़ पाती है।